Sunday, September 21, 2014

Shisha bheru nath stuti

(१) गणपति जी का ध्यान कर ध्यायु शारदा मात। गाऊ प्रार्थना भैरव कि जो है शीशा नाथ ।।

(२) भैरव दीन दयाल प्रभु आप हमारे नाथ । जब जब आई विपदा आपने दिया है साथ।।

(३) देवी पुत्र श्री भैरव, शिवशंकर अवतार ।
हनुमत् संग विराजते भद्रकाली के द्वार।।

(४)शीशा आपको धाम है मन्दिर अति विशाल । शोभा अति सुहावनी दर्शन ली बलिहार ।।

(५) नाथा रा थे नाथ हो भैरव दैव महान । दास आगयो शरण में रखल्यो अपने पास।।

(६) भादव की तेरस न मेलो लगे विशाल।पैदल आवे यात्री पाव मन इंछा वरदान।।

(७) बावन भैरु बतीस कुल  ध्यावे सकल संसार । मरुधर देश मे शीशा भवन बनाय।।

(८) जो गावे भैरव महीमा मनईंछा फल पाय। योगेश ध्याव आपने पुरा किज्यो काज।।#Yogeshpareek18


रावण द्वारा रचित उड्डीश तंत्र पुस्तक फ्री पीडीएफ

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