कामख्या मंदिर में किसी भी प्रकार के पूजन अनुष्ठान हेतु संपर्क करे हम रहने खाने की व्यवस्था करते है पंडित योगेश पारीक ९४३५५७१७९४

Sunday, November 5, 2017

पित्र दोष के लक्षण कारण और उपाय

पंडित योगेशपारीक
पितृ दोष जन्मपत्रिका में जब सूर्य और राहु की नवम भाव में युति हो तो पित्र दोष बनता है वैसे तो पित्र दोष बहुत प्रकार के होते हैं लेकिन मुख्यतः जब सूर्य और राहु की युति किस भाव में हो रही है उससे संबंधित परिवार के संबंधी का पितृदोष माना जाता है जैसे पंचम भाव पुत्र का है और राहु और सूर्य का योग पंचम भाव में बन रहा है तो यह माना जाएगा कि आप के पुत्र  की मृत्यु के पश्चात उसका दोष है इसी प्रकार चतुर्थ भाव में है तो मां का द्वितीय भाव में तो भाई का और इसी प्रकार सब लोगों का ज्ञात किया जाता है
ज्यादा जानकारी और अपनी जन्म कुंडली दिखाने के लिए संपर्क करें योगेश पारीक 9433571794
गुवाहाटी आसाम कामाख्या मंदिर

जब परिवार के किसी पूर्वज की मृत्यु के पश्चात उसका भली प्रकार से अंतिम संस्कार संपन्न ना किया जाए, या जीवित अवस्था में उनकी कोई इच्छा अधूरी रह गई हो तो उनकी आत्मा अपने घर और आगामी पीढ़ी के लोगों के बीच ही भटकती रहती है। मृत पूर्वजों की अतृप्त आत्मा ही परिवार के लोगों को कष्ट देकर अपनी इच्छा पूरी करने के लिए दबाव डालती है और यह कष्ट पितृदोष के रूप में जातक की कुंडली में झलकता है।

पित्र दोष के लक्षण जब कोई जातक पितृदोष से प्रभावित होता है तो उसके घर में सुख शांति नहीं रहती और पति पत्नी के बीच झगड़ा रहना सास-ससुर से झगड़ा रहना और इससे प्रभावित जातक कि घर में कोई अहमियत नहीं रहती वह सही होने पर भी हमेशा गलत माना जाएगा इस प्रकार के लक्षण पित्र दोष के होते हैं जिस कारण प्रभावित जातक जीवन में अपने पथ पर चलने में कठिनाई होती है

पितृ दोष का उपाय किसी योग्य ब्राह्मण को घर में बुलाकर के गायत्री सवा लाख जप करवाएं और भागवत मूल पाठ और विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ करवाई यह एक सर्वोत्तम तरीका है जिससे थोड़े ही समय में पितृ दोष से निवारण  हो जाता है

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गुवाहाटी आसाम कामाख्या मंदिर

Friday, October 13, 2017

Wednesday, June 15, 2016

कामख्या असम गुवाहाटी अम्बुवासी मेला २०१६ (kamakhya assam guwahati ambuwasi mela 2016)


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कामख्या मैया जी जय

दोस्तों
माताओं बहनों भाइयों
कामख्या शक्ति पीठ जो की असम गुवाहाटी में स्थित है !
ये कामख्या रेलवे स्टेशन से लगभग 7 किलीमीटर दूर है !
स्टेशन से बाहर निकलते ही आपको टेक्सी मिल जाती है जो लगभग 200 रूपये  में आपको मंदिर पहुंचा देगी ! मध्यम वर्गीय लोग जो बस से जाना चाहे उनके लिए वो स्टेशन से निकल कर मुख्य रोड तक पैदल आकर बस में बेठ कर मंदिर के मुख्य दरवाजे तक पहुँच सकते है बस का भाडा 5 रुपये होता है ! फिर मुख्य दरवाजे से आपको ASTC की बस या यात्री गाड़ी मिल जाएगी जो आपसे 10 रुपये लेगी वो आपको मंदिर के भीतर पहुचादेगी
(मंदिर में शतचंडी, दस महाविद्या अनुष्ठान , महामृत्युंजय अनुष्ठान करवाने के लिए संपर्क सूत्र पंडित योगेश शर्मा (पारीक )
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रुकने का स्थान 


-- मंदिर प्रांगण में मंदिर की तरफ से भवन बना हुआ है .. जिसमे मुख्यत कमरे बुक रहते है जिसका किराया ५०० रुपये  प्रति दिन है
इसके अलावा आप रहने के लिए पंडित जी के घर में रह सकते है जो प्रति दिन ३००  से ५०० तक मिल जाता है लेकिन नवरात्री और अम्बुवाची  में ये किराया १००० से ३००० तक भी हो सकता है !

 कामख्या पुजारी सिद्धार्थ

 ( संजीब दा) बड पुजारी है +919085200918  इनसे रहने, पूजा, बलि पूजा  के विषय में चर्चा कर सकते है
(मंदिर में शतचंडी, दस महाविद्या अनुष्ठान , महामृत्युंजय अनुष्ठान करवाने के लिए संपर्क सूत्र पंडित

योगेश शर्मा (पारीक )

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दर्शन के समय पूजा की सामग्री -- नारियल सिंदूर दीपक तेल घी अगरबती मोली चुनडी सुहाग पिटारी

अम्बुवाची  मेला २०१६ इस साल प्रति वर्ष के अनुसार  २२ जून से २६ तक रहेगा ! तो आप सभी मेले में भाग लेकर और साधना और दीक्षा ले कर जीवन को सफल बनावे ! अबुवाची ये दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला होता है इस समय में लोग  गुवाहाटी असम (कामरूप ) कामख्या में आकर साधना करते है !

क्या है अबुवाची

 -- इस समय में माना जाता है की जिस प्रकार प्रत्येक स्त्री को मासिक धर्म रहता है उसी प्रकार माँ कामख्या जो योनी की स्वरूपिणी है उनका भी मासिक धर्म रहता है इस अन्तराल में किया हुआ जप सहस्त्र गुना अधिक फल प्रधान करने वाला होता है  ! इस  समय में मुख्यता तांत्रिक साधने होती है ! इस समय अवधी में मंदिर के कपाट (दरवाजे) बंध रहते है मंदिर के अन्दर प्रवेश निषेध होता है ! मंदिर प्रागंण में लोग साधना करते रहते है २६ को जब कपाट खोले  जाते है पुजारी जी  ( पण्डे ) मंदिर की सफाई करके माँ के रज को साफ करके पूजा आरती बलि आदि देकर भक्तो को दर्शन करवाए जाते है पूजा करवाई जाती है
माता का चीर जो की २२ से २६ तक माता धारण करके रखती है!  उसे प्राप्त करके अगर तिजोरी में रखा जाए तो लक्ष्मी स्थिर हो जाती है रोगी धारण करे तो सरे रोग नष्ट नो जाते है इसके अलावा भी बहुत सारे उपयोग में इसे लिया जाता है
पीठ का जल -- इसको भी घर में रखना चाहिए और किसी भी व्यक्ति जो किसी भी बाधा से ग्रस्त है उससे पिलाया जाए तो सही हो जाता है !

।।साधना करने से पुर्व जानने योग्य बाते ।।


कामख्या भगवती सती के अंग से योनि रूप में प्रगट हुई है। और यह देवी का स्वरूप है । इस लिए इनकी साधना नवरात्री में और अम्बुवाची  विशेष फलदायक है तथा यहा गुवाहाटी असम कामख्या में जून महीने में २२ से २६  माता को रजस्वला दोष आता है देवीपुराण के अनुसार सतयुग में यह पर्व 16 वर्ष में एक बार, द्वापर में 12 वर्ष में एक बार, त्रेता युग में 7 वर्ष में एक बार तथा कलिकाल में प्रत्येक वर्ष जून माह में मनाया जाता है। इसे अम्बूवाची योग पर्व कहते है । जिस कारण इस समय में यहा साधना करना तो बहुत बहुत फलदायक है।

केसे करे साधना

 -- अपने गुरु से प्राप्त कोई भी साधना या मंत्र जप इस समय में किया जा सकता है  इसके अलावा दुर्गा सप्तशती का पाठ एवं कामख्या के बीज़ मंत्र का भी जप किया  जाता है!
(मंदिर में शतचंडी, दस महाविद्या अनुष्ठान , महामृत्युंजय अनुष्ठान करवाने के लिए संपर्क सूत्र पंडित योगेश शर्मा (पारीक )
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साधना के नियम

 -- 1  स्नान 2 मानसिक शुद्धी  3 त्रिकाल संध्या 4 लाल वस्त्र ( साधना के अनुसार वस्त्र  ) 5 गुरु पूजन  फलाहार  6 मोन ( हो सके तो बिना बोले ) 7 फलाहार 8 ब्रहचर्य का पालन

मंदिर में शतचंडी, दस महाविद्या अनुष्ठान , महामृत्युंजय अनुष्ठान करवाने के लिए संपर्क सूत्र पंडित योगेश शर्मा (पारीक )
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आप पोस्ट द्वारा माँ की चुनरी और प्रसाद जल और चिर मंगवा सकते है
जय माँ कामख्या
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Wednesday, November 4, 2015

2015 /2016 दिपावली लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का सरल उपाय

बिल्ली के प्रसव के समय बिल्ली के द्वारा एक प्रकार की थैली त्यागी जाती है। जिसे आंवल या जेर कहते हैं। प्रायः सभी पशुओं में प्रसव के समय आंवल निकलता है। परंतु बिल्ली की  विशेषता यह है कि बिल्ली अपना आंवल तुरंत खा जाती है। पालतू बिल्ली का आंवल किसी कपड़े से ढक कर प्राप्त कर लिया जाये तो इसका तांत्रिक प्रभाव धन-धान्य में वृद्धि करता है।

बिल्ली की जेर तांत्रिक सिद्धि या प्रभावी जादुई शक्ति प्राप्त करने में काफी महत्व है। तांत्रिक उद्देश्य के लिए कई तांत्रिक उपयोग यह। खरीद की है, तो बिल्ली की जेर comeby करने के लिए बहुत मुश्किल है, लेकिन बेहद उपयोगी और लाभदायक है। बिल्ली की जेर पारंपरिक रूप से तांत्रिकों द्वारा अत्यधिक लाभकारी और इस्तेमाल मान लिया जाता है, ग्रामीणों, व्यापारियों, राजनेताओं, निवेशकों, शेयर दलालों, जुआरी, व्यापार आदमी, उच्च रैंक के लोगों और नेताओं।

एक बिल्ली बिल्ली के बच्चे को जन्म देता है, जब वह तुरंत उसकी नौसेना की हड्डी खाती है और इसे पाने के लिए कठिन है, क्योंकि यह बहुत दुर्लभ है। बिल्ली की जेर भी बिल्ली की नाल कहा जाता है। यह चमत्कारी शक्ति है और जादुई परिणाम प्रदान करता है।

महत्व और लाभ:

बिल्ली की जार अपने स्वामी को जबरदस्त लाभ प्रदान करता है। यह सोच क्षमताओं और मन की उपस्थिति को बेहतर बनाता है इंसान में आत्मविश्वास का स्तर बढ़ता है। यह भी ग्रह राहु, मंगल और शुक्र के हानिकारक प्रभाव को दूर करने में बहुत फायदेमंद है।

यह भारी मुनाफा और व्यापार में सफलता मिलती है और संचय, धन और पैसे के आरोप में मदद करता है। यह व्यापारियों और हाई प्रोफाइल लोगों को इसे खुद क्यों है कि सभी दौर समृद्धि और परिवार में वित्तीय शक्ति प्रदान करता है।

इसका उपयोग कैसे करना है?

यह नकदी बॉक्स, कार्यालयों, दुकान, घर और कारखाने में सिंदूर के साथ लाल कपड़े में लपेटा रखा जाना चाहिए। इसके उपयोग और एहतियात स्पष्ट रूप से लाल किताब में वर्णित है।

पहले यह सक्रिय है और फिर इसे आप अपने लाभ पूरे दे सकते मंत्र और वैदिक विधि या पूजा से सक्रिय हो गया है। बिल्ली की जेर वशीकरण, दुर्गा पूजा, विष्णु पूजा, मोहिनी पूजा और कई अन्य पूजा और अनुष्ठान में प्रयोग किया जाता है।

वे बिल्ली की यिर्म का असली लाभ है, जो जीवन में धन, धन, संपत्ति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं तो यह है कि हम पूरी तरह से हमारे वफादार ग्राहकों के लिए बिल्ली की जेर सक्रिय प्रदान करते हैं।

बिल्ली की जेर नाल मगवाने के लिए सम्पर्क करे +919435571794

Sunday, October 25, 2015

शरद पूर्णिमा

आश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला त्यौहार शरद पूर्णिमा (Sharad Poornima) की कथा कुछ इस प्रकार से है- एक साहूकार के दो पुत्रियां थी। दोनों पुत्रियां पूर्णिमा का व्रत रखती थी, परन्तु बड़ी पुत्री विधिपूर्वक पूरा व्रत करती थी जबकि छोटी पुत्री अधूरा व्रत ही किया करती थी। परिणामस्वरूप साहूकार के छोटी पुत्री की संतान पैदा होते ही मर जाती थी। उसने पंडितों से अपने संतानों के मरने का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि पहले समय में तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत किया करती थी, जिस कारणवश तुम्हारी सभी संतानें पैदा होते ही मर जाती है। फिर छोटी पुत्री ने पंडितों से इसका उपाय पूछा तो उन्होंने बताया कि यदि तुम विधिपूर्वक पूर्णिमा का व्रत करोगी, तब तुम्हारे संतान जीवित रह सकते हैं।

साहूकार की छोटी कन्या ने उन भद्रजनों की सलाह पर पूर्णिमा का व्रत विधिपूर्वक संपन्न किया। फलस्वरूप उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई परन्तु वह शीघ्र ही मृत्यु को प्राप्त हो गया। तब छोटी पुत्री ने उस लड़के को पीढ़ा पर लिटाकर ऊपर से पकड़ा ढंक दिया। फिर अपनी बड़ी बहन को बुलाकर ले आई और उसे बैठने के लिए वही पीढ़ा दे दिया।
बड़ी बहन जब पीढ़े पर बैठने लगी तो उसका घाघरा उस मृत बच्चे को छू गया, बच्चा घाघरा छूते ही रोने लगा। बड़ी बहन बोली- तुम तो मुझे कलंक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से तो तुम्हारा यह बच्चा यह मर जाता। तब छोटी बहन बोली- बहन तुम नहीं जानती, यह तो पहले से ही मरा हुआ था, तुम्हारे भाग्य से ही फिर से जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है। इस घटना के उपरान्त ही नगर में उसने पूर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।

Thursday, July 16, 2015

कामख्या माता की साधना

नमस्कार में योगेश पारीक आपका स्वागत करता हु। आज में आपको बताऊंगा की भगवती कामख्या की साधना कैसे करे और कब करे ।

भगवती कामख्या माता का मंदिर गुवाहाटी असम में है ये मंदिर कामख्या रेलवे स्टेशन से 8 किलोमीटर दूर है । यहा रहने की व्यवस्था है और शुद्ध शाकाहारी भोजन की भी व्यवस्था

                  ।।साधना करने से पुर्व जानने योग्य बाते ।।

कामख्या भगवती सती के अंग से योनि रूप में प्रगट हुई है। और यह देवी का स्वरूप है । इस लिए इनकी साधना नवरात्री में विशेष फलदायक है तथा यहा गुवाहाटी असम कामख्या में जून महीने में 22 23 24 25 माता को रजस्वला दोष आता है देवीपुराण के अनुसार सतयुग में यह पर्व 16 वर्ष में एक बार, द्वापर में 12 वर्ष में एक बार, त्रेता युग में 7 वर्ष में एक बार तथा कलिकाल में प्रत्येक वर्ष जून माह में मनाया जाता है। इसे अम्बूवाची योग पर्व कहते है । जिस कारण इस समय में यहा साधना करना तो बहुत बहुत फलदायक है। तथा जिस प्रकार हम किसी विशेष व्यक्ति से मिलने जाते है तो उसके बारे में जनके जाते है उन्हें क्या पसंद है क्या नही क्या पहनना अच्छा लगता है क्या नही क्या खाना पसंद है क्या नही इस प्रकार कामख्या माता की पसंद का भी पता होना बहुत जरुरी है।
                 
                     ।। साधना के लिए अच्छा मुहूर्त ।।

माता कामख्या की ही नही कोई भी साधना करने के लिए आपको अच्छा समय देखना अत्यंत जरुरी है क्यों की जिस प्रकार पतझड़ में फल फुल नही लगते उसी प्रकार बिना अच्छे मुहूर्त के बिना साधना में सफलता नही मिलती ।
साधना का मुहूर्त
नवरात्री - चैत्र ,आषाढ़ (गुप्तनवारात्री) ,आषोज, पोष (गुप्तनवरात्री)
अम्बुवाची - जून 22 23 24 25
ग्रहण - चन्द्र और सूर्या
सावन - देवधुनि मेला

रावण द्वारा रचित उड्डीश तंत्र पुस्तक फ्री पीडीएफ

https://drive.google.com/file/d/1ICGiiZw6hwF2vdr32Sqvn4-gZyKo9lN9/view?usp=drivesdk